बिहार दिवस को लेकर सूबे भर में उत्साह का माहौल है, जिला प्रशासन द्वारा इस अवसर पर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, खासकर सुपौल जिला मुख्यालय में इसको लेकर भव्य तैयारी की गई है, इतना ही नहीं जिले के तमाम प्रखंड मुख्यालयों में भी भव्य तैयारी की गई है, स्थानीय प्रशासन द्वारा इसको लेकर प्रखंड सह अंचल मुख्यालयों में भी कई तरह के आयोजन किए गए हैं ताकि इस ऐतिहासिक और गौरवान्वित करने वाले पल बिहार दिवस को यादगार बनाया जा सके, लेकिन इससे इतर पिपरा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में बिहार दिवस को लेकर स्थानीय प्रसाशन द्वारा उदासीनता बरती गई है, प्रखंड सह अंचल कार्यालय गेट पर ताला जड़ा हुआ है, कार्यालय परिसर में किसी तरह का चहल पहल नहीं है, न कोई साफ सफाई, न लाइटिं
ग न कोई आयोजन अन्य अवकाश के दिनों की भांति प्रखंड सह अंचल कार्यालय बीरान सा दिखाई दे रहा है. लिहाजा लोगों में यह बात चर्चा का विषय बन गया है, कि आखिर बिहार दिवस के इस खास मौके पर प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में किसी तरह की चहल पहल
क्यों नहीं है, लोगों ने स्थानीय प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया है, हालांकी इस बाबत पूछे जाने पर पिपरा बीडीओ अमरेंद्र पंडित ने कहा कि उन्हें इस बाबत कोई जानकारी नहीं है शाम को बल्ब लगा दिया जाएगा।
जाहिर सी बात है ऐसे अवसरों पर इस तरह की प्रशासनिक उदासीनता से जहां आम लोगों का मनोबल टूट रहा है वहीं विभागीय अधिकारी की गैर जिम्मेदारी को भी उजागर कर रही है,मालूम हो कि बिहार दिवस हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है, जो बिहार राज्य के गठन का प्रतीक है, बता दे कि 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रांत के बिहार और उड़ीसा डिवीजनों को अलग करके बिहार और उड़ीसा प्रांत बनाया गया था, यह दिन बिहार में सार्वजनिक अवकाश रहता है, और इस अवसर पर प्रशासनिक स्तर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिससे तमाम बिहार वासी गौरवान्वित होते हैं।

